Nov 25, 2018

स्वयं से

कोई तो मेरे अंदर है जो सब कुछ जब ठीक चलता दिखे तो कहीं मेरे अपने अस्तित्व का बोध करने से नहीं चुकता है.
निशब्द होता है वह, पर बहुत चीखती सी एहसास कराने में बिलकुल सधा हुआ सा...
मैं अकेला कहीं अपनी धुन में मगन ज़िन्दगी का मज़ा लिए जा रहा था कि तुम मिल गए - एक गीत मेरे जेहन में कहीं हमेशा गुनगुनाता सा.
फिल्म का नाम भी था मनपसंद और जीवन हमेशा जीना चाहा उसी ढर्रे से.
पर मौलिकता का जब सामना पैमाने से होता है तो फिर शुरुआत होती है आंकने का और वहीँ से प्रारम्भ होता है प्रतिस्पर्धा, विफलता और न जाने कितने प्रकार के अक्षमता का भी- फिर शुरू होता है हरके पहलुओं पर ऊँगली उठाने का और अंत में रुकता है खुद पर... 
मैं क्यों?
मैं तो अलमस्त अल्हड सा ज़िंदगी के स्वछंद भाव को स्वीकार कर लिया था फिर ये सारे नए सिरे से जीवन के आंकलन और नए लक्ष्य क्यों?
जवाब मेरे ही अंदर से आता है - दुनिया का बस यही तौर तरीका है - अगर तुमने फलां फलां नहीं हासिल की या "उसके" तरह नहीं कुछ कर पाए तो असफल कहलाओगे...
या फिर "ये तुमने क्या हासिल किया, तुमसे कम आंके जाने वाले  या तुमसे काम योग्यता वाले या तुमसे बाद सब कुछ आरम्भ करने वाले कहाँ से कहाँ और तुम बस यहाँ?"
इतने सारे प्रश्न मेरे पास जवाब में बस मेरा अपना वर्तमान. बस यही जमा पूंजी है - और एक बेबस सा मैं जो स्वयं के बनाये मापदंड में बहुत असफल सा निकम्मा सा और न जाने कहीं अपराध बोध से ग्रसित होता सा दिन पर दिन संकुचित हो के बौना बनता सा.... 
आखिर क्यों इतने सारे जंग लड़ने के बाद मैं फिर से नए जंग लड़ने लगता हूँ?
कौन है मेरे अंदर जो मेरे साथ सामंजस्य नहीं करता?
कौन है वो जो मेरे यथार्थ से ज़्यादा उसके परिकल्पना में मेरे भविष्य के होने वाले व्यक्तित्व को देखना ही पसंद करता है? 
हाँ, मैं गौरान्वित होना चाहता हूँ, अपनी आजतक के जमापूंजी से ही...
मैं बहुत खुश रहना चाहता हूँ अपने सीमितता में ही... 
मैं सबसे बड़ा और सबसे सुखी हूँ अपनी दुनिया में....
मैं क्यों बहक जाता हूँ?
अंतर्द्वंद बहुत प्रगाढ़ है - प्रयास सिमित है और आकांक्षाएं असीमित. 
सम्राट अशोक ने कलिंग जीतने के बाद क्या जीता? अपने अहंकार के ऊपर उसकी हार हुयी और वह जीत के भी स्वयं से हार गया था....
इस के बाद और क्या कहना है?
स्वयं से कलिंग के युद्ध में हार कर लूँ?
संधि कर लूँ ?
या चलने दूँ इस युग युगांतर से चले आ रहे अन्तर्युद्ध को?

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